Love business Hindi part 3
प्रेम का business
part3
Hello....पार्थ ने जान बूझकर एक शर्त रखी जो रिद्धि का परिवार पुरी नहीं कर सकता, जिसे पार्थ पहले से जानता था। पार्थ की शर्त थी कि उसे रिद्धि के परिवार को अब तक दिए गए सभी पैसे को देखना होगा। इसके बाद ही वे तलाक देंगा। रिद्धि के परिवार को फिर से पार्थ के साथ रहने के लिए कहा गया था। रिद्धि भी अपने परिवार की खुशी के लिए पार्थ से जुड़ने के लिए सहमत हो जाती है। लेकिन मैं उसके दिल में बैठा था। कि मैं इसके बिना नहीं रह सकता। अब रिद्धि मेरे बिना नहीं रह सकती थी।
रिद्धि ने पार्थ के फिर से लंदन जाने की बात की। उसे बताएं कि अगर मैं तुमसे खुश नहीं हूं और तुम मुझसे खुश नहीं हौ.। यदि तुम कहते हौ कि मुझे तुम्हारी 'अन्य लड़कियों के साथ चक्कर ' के बारे में नहीं पता है, तो यह तुम्हारा भ्रम है। मैं सब कुछ जानती हूं जो तुम कहते हो लेकिन मैं अपने परिवार की शांति के लिए चुप हूं। तो अब हम दोनों को अपने अपने रास्तें होना चाहिए। मैं तुम्हारे जीवन में हस्तक्षेप नहीं करूंगी और तुम मेरे जीवन में हस्तक्षेप नही करोगे। 'पार्थ मान जाता हैं। लेकिन अभी भी तलाक पर नहीं है।ये सभी बातें पार्थ की माँ को पता चलती हैं। वे रिद्धि के चरीत्र पर सवाल करती है। वे रिद्धि के परिवार को कहने को कहती है |जो रिद्धि से सहन नही होता| ओर वह हमारे रिश्ते तोड़ने की योजना बना ती हैं। मुझे फोन किया। वह मुझे वहां होने वाली सभी घटनाओं के बारे में बताती है। 'नील - हाँ, तो हमें पार्थ की शर्त के अनुसार पैसा देना चाहिए और सब कुछ खत्म कर देना चाहिए। फिर तुम वापस आ जाना अब मेरे पास ब्रिटिश नागरिकता है। और हम दोनों की शादी के बाद हम ब्रिटिश होंगे।
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| Love you |
रिद्धि - शांति नील तू बहुत आगे विचार कर रहा हे केवल उसी के बारे में सोचता है जो नहीं हो सकता |मैं अपने परिवार के लिए कुछ भी करने जा सकती हूं। , मै अपनी इच्छा के विपरीत भी पार्थ के साथ ही रहोगी । ताकि मेरे परिवार पर कोइ भी जीवन आंख ना दिखा सके
नील तुम्हारा क्या? मैं हमेशा तुम्हें खुश देखना चाहता था। फिर से तुम्हारी अे हालत में नहीं देख सकता| तुम को कोछ भी कर के वापस आना होगा।
'रिद्धि - नील कहना आसान है। मैं यहाँ पीड़ित हूँ मुझे पता है, 'मैं के से दीन कअढ रही हूँ। मैं तेरे साथ भी रहना चाहती हूं। अपना भविष्य देख ना चाहती हु । लेकिन अपने परिवार की खुशी और शांति के लिए, मुझे बलिदान देना होगा। नील - कोई और रास्ता नहीं है।
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| Love |
रिद्धि- नहीं, तुम मुझे भूल जाओ। हम इस जन्म से मिलने से रहे। By । और पार्थ से बात नहीं करना । नहीं तो उसे पता चल जाएगा कि मैं अभी भी तुमसे बात कर करती हूं.
नील - ऐसा मत कहो। हमारी पूरी कोशिश होगी लेकिन रिद्धि ने मेरा आखिरी शब्द सुनने के पहले ही फोन काट दिया। यह कहना आसान है, साहब , के मुझे भूल जाओ ।
(यदि आपको इस व्यक्ति को 'मेरे जीवन' मे नहीं बनाना है तो भगवान उन्हें क्यों भेजता है? )
वे नहीं जानते हैं कि आदत हौ गई है
और उनके बिना नहीं रह सकते
मेरी समझ में यह नहीं आया कि रिद्धि की पूजा करने की मेरी आदत कैसे हो गई।
इसके बिना मेरा अस्तित्व ही नहीं है।अगर ऐसा नहीं होआ तो मैं क्या होगा ? मुझयअंदर अंदर एक ही सवाल खा रहा था। मैंने पार्थ से बात करने के बारे में सोचा, शायद हमारी भावनाओं को समझाए|
नील - hello,पार्थ
पार्थ - ओह, नील Sir आपको बहुत दिनों बाद याद आइ । मैं सोच रहा था कि रिद्धि यहां आएगी, तरत आपका फो आएगा लेकिन आप बुशदिल निकले ।
नील - तुम कहना क्या चाहते हो। मूझे अभी कोछ दिन पहले पता चला रिद्धि ने ना बुला था बात करने के बारे में इस उलझन में था, लेकिन बात करे बिना कुछ भी नहीं रास्ता नही था। तो भाई बंद कर यह सब और रिद्धीको छोड़ दे, तो इसे क्यों नहीं छोड़ता?
पार्थ- मै ने कहा ना बुला |मेरी शरत पुरी करो ओर मै तलाक दे दुगा।
नील - तो अगर पैसा वास्तव में मिल गए| तो रिद्धि को तलाक दे दूंगा.|
पार्थ - हां, मुझे भी अब रिद्धि में कोई दिलचस्पी नहीं है। मुझे सिर्फ अपने रुपए से मतलब है। यह सोचा था कि अगर मैं रिद्धि में कुछ इनवेस्ट कर देता हूं, तो मुझे कुछ भी कूछ फायदा होगा,पर ऐसा नहीं हुआ 'तू मेरे पैसा वापस कर दै और मैं रिद्धि को वापस कर दूंगा। |
नील - ठीक है मैं तुम्हारे सारे रूपये थोडे समय वापस कर दूंगा। बस रिद्धि को परेसानी से मुक्त करदै ना
पार्थ - डायलोग बाजी नहीं। मुझे रुपया चाहिए।
नील-भले ही मैंने खुब कोसिस की पैसा भेघी करने की पर
हारकर आखिरकार घर पहुंचा|मेरे उदास चेहरे को देखा और पूछा कि भाई उदास क्यों है |मगर मैने कुछ भी कह से मना कर दिया पर लेकिन बहन ने और अधिक बल दिया तो सारी बात बताई दी। दीदी ने जल्द ही उठकर मुझे अपने गहने के लिए जो बचत की थी, वह मुझे दे दी।
नील - ना दीदी ऐसा नही। वेसे ही मै तुम पर बुझ हु..
दीदी - नील तु बहुत बोल नै लगा| मैं तुम्हारी बड़ी बेन हूँ ।मां समान और कोई भी अपनी संतान को दुःख में नहीं देख सकता है। और मैं तुम्हें यह धन केवल गहनों के लिए दे रही हु. क्योंकि मैं यह भी जानता हूं कि रिद्धि किसी आभूषण से कम नहीं है। दीदी से पैसे लेकर पार्थ को पैसे दे दीये|ओर निद्धी को लंदन बुला लिए|
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| Love you for you |
दोनों अब लंदन में एक साथ अपनी शादीशोदा जीवन खुशी से जी रहे हैं। तो क्या आप समझते हैं कि दोस्तों का प्यार सच्चा और अटूट है या अंत में आप एक साथ चलेंगे। पैसे से प्यार को कभी मत तौलो। प्यार को कभी धंधा नहीं बनाना चाहिए बल्कि अपना विश्वास बेचना चाहिए। और दूसरी बात यह है कि लड़कियों को न केवल शादी के बाद घर का काम करने की जरूरत होती है, अगर वे यह काम करना चाहती हैं। अभी महिलाएं पुरुषों की तुलना में हर क्षेत्र में ज्यादा अंजान हैं। इसे बिना किसी शर्म के साथ देखना और उन्हें हमेशा बडा होने के लिए प्रोत्साहित करना। 'क्षमा करें यदि कोइ बात मै और टिप्पणी मै भुल हु'।
Thank you for Reading
Part-1 Part -2
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